प्रस्तावना

जैन धर्म विश्व के प्रचीनतम धर्में में से एक हे, जैन धर्म के अनुसार हमारे प्रथम जैन तीर्थंकर भगवान ऋषभ देव ने असि, मसि व कृषि की शिक्षा दी। भारत वर्ष में जैन समाज की समृद्धिशाली, संस्कृति, पुरातत्व व स्थापत्य धरोहर हैं। सम्पूर्ण राष्ट्र में जैन धर्म के अनुयायी व्यापार, उद्योग, शिक्षा, अध्ययन सभी क्षेत्रों में  अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। देश के जनसंख्याकारों के अनुसार 94.1 प्रतिशत जैन समाज की जनसंख्या शिक्षित है। सन् 2011 के जनसंख्याकारा के अनुसार हमारी कुल आबादी 45 लाख बताई गई है परन्तु ऐसा प्रतीत होता है कि या तो शिक्षित होते हुए भी हमारे हमारे समाज के लोगों के धर्म के कालम को अनजाने में महत्व नहीं दिया अथवा जनगणना कर्मियों ने इस कॉलम में हिन्दू वर्णित कर दिया अथवा अनजाने में हिन्दू लिखवा दिया गया। सामाजिक सूत्रों व मुम्बई उच्च न्यायालय के एक आदेश का संदर्भ लें तो जैन   धर्मावालम्बियों की संख्या एक करोड़ से ऊपर मानी गयी हैं।

इस लगभग 2 करोड़ से अधिक जनसंख्या वाला समाज सभी क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभाने के बावजूद भी यह मात्र संयोग या दुर्भाग्य की कहा जाएगा कि समाज की राजैनिक क्षेत्र में भागीदारी निरन्तर कम होती जा रहा हैं। यदि संविधान सभा में हमारे समाज के पांच प्रतिनिधि थें, प्रथम लोकसभा में 35 व वर्तमान लोकसभा में मात्र दो प्रतिनिधि समाज की घटती राजनैतिक शक्ति की स्पष्ट झलक है। ऐसी ही स्थिति राज्यों की विधान स्थल, बहुमूल्य पुरातत्व मूर्तियों व स्थापत्य कला के साथ-साथ उद्योग व व्यापार का संरक्षण व संवर्धन कैसे करें। वर्तमान में बिना राजनैतिक हिस्सेदारी के यह संभव नहीं हैं। हमें परोक्ष राजनैतिक भूमिका के स्थान पर राजनैतिक हिस्सेदारी की आवश्यकता है और उसे प्राप्त करने के लिए हमें संगठित होकर अपने एक राजनैतिक संगठन को एकजुट होकर खड़ा करना होगा। गत वर्षों से हम इस प्रयास में कार्य कर रहे है और उसके अच्छे परिणाम भी परिलक्षित हो रहे हैं।

 

अल्पसंख्यक की राष्ट्रीय मान्यता

27 जनवरी 2014 की अधिसूचना द्वारा- अल्पसंख्यक की मान्यता प्राप्त होने से जैन समाज की सबसे बड़ी उपलब्धि जैन धर्म के स्वतंत्र अस्तित्व की संवैधानिक मान्यता प्राप्त होना है तथा इाके साथ ही हमारे धार्मिक

स्थल, तीर्थ स्थल, पुरातात्विक धरोहरें के संरक्षण संवर्धन व विकास के नये आयाम मिलेगा साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में हमारी जैन संस्थाओं को अपने विद्यालयों में 50 प्रतिशत सीटें जैन समाज के लिये आरक्षित करने  का अधिकार होगा तथा हमारे शिक्षण संस्थाओं में नियुक्तियों के लिये हम पूर्ण स्वतंत्र होगें। जैन समाज के धार्मिक एवं परमार्थियों ट्रस्टों की परिसंपतियों किराया नियंत्रण कानून से मुक्त होगी।

बच्चों व युवाओं को शिक्षा के लिए शिक्षण शुल्क प्रतिपूर्ति व स्कॉलरशिप के लिए पात्रता होगी। यहाँ तक कि उच्च शिक्षा तथा विदेशों में शिक्षा के लिए भी बैंको से कम ब्याजदरों पर ऋण प्राप्त हो सकेगा। साथ ही समाज को स्कूल, कॉलेज प छात्रावास व प्रशिक्षण संस्थान खोलने के लिए भी सहयोग व सुविधायें प्राप्त होगी। इस उपलब्धि के लिए जैन राजनैतिक चेतना मंच, जैन समाज की सभी संस्थायें तथा तत्कालीन ग्रामीण विकास राज्यमंत्री प्रदीप जैन आदित्य के सहयोग व प्रयासों की हम से प्रशंसा करते हैं तथा समाज को इसकी विस्तृत जानकारी के लिए देश भर में विशेष कार्यशालायें के लिए हम मंच को से संकल्पित करते हैं।

 

राजनैतिक शक्ति प्राप्ति के साधन

प्राप्ति के साधन- हम सामान्यतया कहते हैं कि हम इतने व्यस्त है कि राजनीति के लिए हमारे पास समय  नहीं हैं यहाँ आपक संज्ञान के लिए बताना चाहता हूँ कि हम सबसे अधिक शिक्षित समाज से परन्तु जनगणना 2001 के अनुसार हमारी जनसंख्या के पुरुष 100 में से 55.2 प्रतिशत कार्यरत है, वहीं शिक्षित नारी शक्ति को अपने व्यापारिक, औद्योगिक कार्य के क्षेत्र में भागीदारी प्रदान कर अपनी राजनैतिक भागादारी के लिए समय निकाल सकते निकाल सकते हैं, उन्हें अग्रणी कर राजनैतिक शक्ति की दिशा में आगे बढ़ा सकते हैं। यदि अनुपातिक आधार पर समय प्रबन्धन व संसाधन की बात करें तो हमारी पास नेतृत्व प्रदान करने के लिए बहुमूल्य समय व संसाधन उपलब्ध हैं।

 

जैन धर्मावलम्बियों की उपस्थित

2011 को जनगणना के अनुसार सभी राज्यों व केन्द्र शासित प्रदेशों में जैन धर्म के मानने वाले निवास करते हैं और उन्होंने अपनी धार्मिक भावनाओं और मान्यताओंं के निर्वहन के लिए सभी जगह धार्मिक स्थलों का निर्माण कराया हैं। उनकी सुरक्षा व देख रेख एक अहम् भूमिका है। सन् 2011 की जनसंख्या के अनुसार केवल 7 राज्यों में हमारी जनसंख्या 1 प्रतिशत से अधिक हैं। ये राज्य है- महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, कर्नाटक व दिल्ली। इसे एक संयोग ही कहा जायेगा कि विशाल धार्मिक तीर्थक्षेत्रों वाला राज्य जहाँ से हमारे 20 तीर्थकर मोक्ष गये, ऐसे झारखण्ड राज्य में हमारी जनसंख्या केवल 16 हजार ही हैं। इन प्राचीन तीर्थ क्षेत्रों की रक्षा के लिए राजनैतिक एक जुटता, प्रतिनिधित्व व शक्ति प्राप्त करना अनिवार्य है।

 

लक्ष्य

राजनैतिक शक्ति बनने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमें राज्य स्तर पर, संसदीय क्षेत्रों के स्तर पर,

विधानसभा क्षेत्रवार, नगर निगमों व नगर पालिकाओं, जिला पंचायतों के स्तर पर अपनी जनसंख्या का विश्लेषण करना होगा तथा अपनी अधिकतम आबादी वाले 30 संसदीय क्षेत्र 250 से 300 विधानसभा क्षेत्र तथा नगरपालिकाओं व जिला पंचायतों का चिहिन्त क्षेत्रों के लिए राष्ट्रीय व क्षेत्रीय राजनैतिक दलों से सीटों की मांग करनी होगी तथा उन पर अपनी सम्पूर्ण शक्ति लगाकर स्व-जातीय सामाजिक प्रतिनिधियों की जीत के लिए आर्थिक व सामाजिका सहयोग प्रदान करना होगा। इन सीटों में यदि हम 25 प्रतिशत  सीटों पर भी जीत हासिल कर सकें तो यह एक बहुत बड़ी राजनैतिक उपलब्धि होगी।

 

संकल्प व विकास यात्रा

विगत आठ वर्षों में जैन राजनैतिक चेतना मंच का विस्तार लगभग सभी संदर्भित राज्यों में हुआ हैं तथा विभिन्न प्रांतो में प्रान्तीय इकाइयां बढ़ चढ़कर कार्य कर रही हैं। मध्यप्रदेश  में राजनैतिक मंच ने अपना सशक्त संगठन खड़ा कर लिया है व प्रभावी भूमिका निभा रहा हैं। राजस्थान प्रारम्भ से ही संगठनात्मक दृष्टि से अच्छा कार्य कर रहा है तथा इसका विस्तार भी मंडल व जिला इकाइयों तक पहुंच गया हैं दिल्ली इकाई गतिशीलता से कार्य कर रही है उ.प्र. का दो दिवसीय लखनऊ अधिवेशन प्रभावी रहा हैं। महाराष्ट्र में नागपुर व मुम्बई में अधिवेशन हुए है और संगठन धरातल पर पहुंचने के लिए कार्य कर रहा हैं। कर्नाटक के वेलगांव में बहुत ही प्रभावी ढंग से संगठन की स्थापना हुईंं। पश्चिम बंगाल  में से भी संगठन ने अपनी दस्तक दी है असम व झारखण्ड की इकाई प्रगति पर हैं। गुजरात में संयोजक की घोषणा हुई हैं परन्तु अभी धरातल पर कार्य करना आवश्यक है हरियाणा के चुनाव में राजनैतिक मंच ने उल्लेखनीय भूमिका निभायी हैं। परन्तु इकाई बनना बाकी है। छत्तीसगढ़ इकाई बहुत ही प्रभावी ढंग से संगठन को खड़ा कर रही है और मडलों से लेकर जिला इकाइयां तक गठित की जा चकी है।

हमारा मानना है कि अब तक किये गये कार्यों पर संतोष व्यक्त किया जा सकता है परन्तु बहुत कार्य शेष है हमें निश्चित ही एक राष्ट्रव्यापी जन जागण यात्रा निकालनी चाहिए और वर्ष 2016 को संगठन का विस्तार व प्रभावी बनाने का लक्ष्य लेकर कार्य करना चाहिए ताकि हम आने वाले समय में जैन समाज को अधिक से अधिक सीटों पर टिकिट दिलाने, राजनीति में प्रत्यक्ष भूमिका निभाने चुनाव लड़ाने व ग्राम पंचायत से लोकसभा तक जैन समाज के प्रतिनिधित्व का मार्ग प्रशस्त हो सके।

आर्थिक संसाधन व सहयोग

हमारा समाज राजनैतिक दलों को बहुत बड़ी आर्थिंक सहायता प्रदान करता है। हमारे उघोग व व्यापार सभी राजनैतिक दलों को सहयोग प्रदान करते हैं। यदि हम को राजनैतिक    धरातल पर खड़ा करना चाहते हैं तो हम आर्थिक सहयोग को दो हिस्सों में भेज सकते हैं। 75 प्रतिशत   सीधे राजनैतिक दलों को दे तथा 25 प्रतिशत हमारे समाज के राजनैतिक मंच को प्रदान करें। कालांन्तर में एक अच्छी आर्थिंक सुदृढ़ता से हम अपना एक कार्यालय दिल्ली में बनाकर वहां नियमित राजनैतिक जनसंपर्क का केन्द्र बना सकते हैं व चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को सीधे आर्थिक सहयोग भी प्रदान कर सकते है। इस तरह हमारे पास सीधी व परोक्ष दोंनो तरह राजनैतिक शक्ति प्राप्त हो सकती हैं।

 

राजनैतिक दिशा में प्रमुख बिन्दु

01. राजनैतिक दिलों के सक्रिय सदस्य बनें।

02. राजनैतिक दलों के संगठनिक ढ़ांचे में शक्ति अर्जित करें।

03. हम राजनीहम को दूषित खेल न मानकर सत्ता, शक्ति व अपने अधिकारों की रक्षा माध्यम माने।

04. नारी शक्ति का समय प्रंबधन व राजनैतिक प्रबोधन में पूर्ण उपयोग करें।

05. जिन सीटों पर स्व-जातीय व्यक्तियों को टिकट मिले उन्हें आर्थिक व सभी प्रकार का सहयोग प्रदान करें। हम यहद असम्भव न हो तो, व्यक्तिगत राजनैतिक प्रतिस्पर्धा से ऊपर उठकर दल के स्थान पर     स्व-जातीय सद्भावना को प्रभुता प्रदान करें।

06. द्वि- ध्रवीय राजनैतिक समीकरणों वाले राज्यों में पार्टी का टिकट जीत की महत्वपूर्ण कड़ी होती है। वहाँ टिकट प्राप्त करने का प्रयास करें।

07. केन्द्र व राज्यों में बहुत से पद जिनका दर्जा मंत्री स्तरीय होता है, नार्माकन के लिए उपलब्ध होते है। नामांकन वाले पदों के लिए प्रथम दृष्टयता प्रयास करें। इसमें संख्या बल की आवश्यकता नही होती अपितु समर्पण, सहयोग अधिक महत्त्वपूर्ण होते हैं।

आईयें हम संगठित होकर समाज में राजनैतिक चेतना जगाये।

आईयें हम समाज में राजनैतिक नेतृत्व प्रदान करने की क्षमता बनायें।

आईयें हम इस कार्य के लिए संगठन तैयार करें।

राष्ट्रीय अध्यक्ष

निर्मल कुमार जैन सेठी

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष

चक्रेश जैन, नई दिल्ली चन्द्रराज सिंधवी जयपुर

एस.के.जैन नई दिल्ली रविन्द्र काला, इन्दौर

राष्ट्रीय महामंत्री

ललित जैन, एम.पी. जैन रवि सेन जैन हुकुम जैन काका

निकुंज जैन (राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष)विनोद जैन (राष्ट्रीय प्रवक्ता)

प्रकाश मोदी (मीडिया प्रभारी रायपुर) प्रदीप जैन (मीडिया प्रभारी रायपुर)

राष्ट्रीय मंत्री

सुकीर्ति जैन(पूर्व विधायक) कटनी सुधा जैन, सागर संजय बी. पाटिल (विधायक) बेलगाम, अतुल जैन अमरोहा नवीन जी जैन, आगरा उदय जैन, सागर, कमल अजमेरा, हरदा कमल जैन, झांसी ताराचंद जैन, देवधर, प्रमोद जी जैन, बड़ौत रमेश काला, आसाम कमल जैन, दिल्ली

दीपचंद जैन , मिर्जापुर सुमित जैन, सचिव दिल्ली, विनोद जैन दिल्ली

कार्यकारिणी सदस्य

सरला जैन कैबिनेट मंत्री- छत्तीसगढ़, महेन्द्र कुमार जैन अघ्यक्ष-दिल्ली, राजीव डौडनवार अध्यक्ष कर्नाटक विजय जैन पाटनी अध्यक्ष मध्य प्रदेश प्रवीण जैन अध्यक्ष छत्तीसगढ़ सुरेन्द्र सेठी अध्यक्ष – पं. बंगाल निर्मल जैन गोधा अध्यक्ष राजस्थान पवन घ्रुवारा अध्यक्ष बुन्देलखण्ड प्रमोद पाटनी अध्यक्ष गुवाहाटी सुमत जैन लल्ला अध्यक्ष विदर्भ  नागपुर रवि जैन अध्यक्ष तेलागांना, प्रमेन्द्र जैन अध्यक्ष आगरा जितेन्द्र जैन अध्यक्ष इटावा पुखराज पहाड़िया महामंत्री राजस्थान सुभाष काला महामंत्री मध्यप्रदेश राहुल जैन महामंत्री छ.ग. मामचन्द्र जैन महामंत्री दिल्ली सुनीता काला महामंत्री दिल्ली प्रमोद जैन नेताजी आगरा विपिन मेहता संयोजक मुम्बई सिम्मी जी जैन पार्षद दिल्ली संजय जी जैन पार्षद दिल्ली किशोर डब्बू पार्षद बैतलू कल्पना जी जैन पार्षद दिल्ली पदमा अनिल भोजे पार्षद इन्दौर आशा हुलासराय सोनी, पार्षद इन्दौर सीमा राजकुमार जैन अध्यक्ष नगर पालिका निगम विसवा विजय सेठी अध्यक्ष नगर पालिका खारोच म.प्र राजकुमार जैन अध्यक्ष नगर पालिका मनावर संतोष जैन उपाध्यक्ष मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम, छिन्दवाड़ा, शिखा जी जैन दिल्ली अनीता जैन दिल्ली  शैलेन्द्र जी जैन झांसी इंजी, अनिल जैन अंचल ललितपुर शैलेन्द्र जैन लखनऊ विकेश मेहता बांसवाडा सुदेश जैन दिल्ली प्रमोद जी जैन फरूखाबाद विनोद जी जैन बड़ौत के.सी. जैन लखनऊ सुनील खजुरिया ललितपुर मनोज सेठ, जबलपुर रेखा जैन जबलपुर निलेश जैन बर्गी, अशोक जैन क्रांतिक्रारी , पंकज जैन कोटा।